नन्हे दोस्तों को समर्पित मेरा ब्लॉग

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चूड़ियाँ ये आपकी : ग़ज़ल : रावेंद्रकुमार रवि

>> Friday, September 17, 2010

चूड़ियाँ ये आपकी


चूमकर गोरी कलाई, ढीठ बनकर आपकी!
मुँह चिढ़ाती हैं हमें, चूड़ियाँ ये आपकी!

रंग इन पर तब सजा, केतकी के फूल-सा!
जब रिझाती हैं हमें, चूड़ियाँ ये आपकी!

छोड़कर सब काम आना, रोज़ पड़ता है हमें!
जब बुलाती हैं हमें, चूड़ियाँ ये आपकी!

अगर चाहा रूठना, आपसे हमने ज़रा भी!
मना लेती हैं हमें, चूड़ियाँ ये आपकी!

प्रीत के मधु पलों में, गीत पावन मिलन के!
सुना देती हैं हमें, चूड़ियाँ ये आपकी!

रूप धर जब किरण-सा, बात रवि की मानतीं!
ख़ूब भाती हैं हमें, चूड़ियाँ ये आपकी!

रावेंद्रकुमार रवि

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उसकी याद सजाने निकले : ग़ज़ल : रावेंद्रकुमार रवि

>> Wednesday, June 30, 2010

उसकी याद सजाने निकले


जब तुम हमें लुभाने निकले!
हम तुम पर मिट जाने निकले!

तुम पर अच्छी ग़ज़ल पढ़ी तो,
हम दिल से कुछ गाने निकले!

भूल सके ना अब तक जिसको,
फिर से उसे भुलाने निकले!

कल ही जिससे मुँह फेरा था,
उसको गले लगाने निकले!

जिस लौ में ना जले पतंगा,
उस लौ को जलवाने निकले!

"रवि" को जिसने याद किया है,
उसकी याद सजाने निकले!

रावेंद्रकुमार रवि

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