कविता एक सुरीली : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत
-
*सभी नन्हे साथियों को ढेर-सारा प्यार!*
नए साल में मैं अभी तक
सरस पायस पर कोई रचना नहीं सजा पाया था!
आज अंतरजाल पर विचरण करते समय
मेरी मुलाकात अनुष्का से...
13 years ago
5 टिप्पणियाँ:
प्रिय रावेंद्रकुमार रवि जी
नमस्कार !
बहुत प्यारी रचना लिखी है ।
एक समीकरण
अभी तक
सिद्ध नहीं कर पाया,
जो कभी
दिया था तुमने -
"मैं + तुम = एक"
बंधु , प्रेम की पहेली बूझना कठिन ही होता है …
- राजेन्द्र स्वर्णकार
प्रेम गली अति साँकरी, जा में दो न समाय!
बहुत सुन्दर और शानदार प्रस्तुती!
शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!
"मैं + तुम = एक"
bahut sundar ....
JABARDASHT RACHNA ,
YAAR SAARI ZINDAGI ISSI SAMIKARAN KO HAL KARNE ME CHALI GAYI .. LEKIN SOLVE NAHI HUA..
AUR MUJHE LAGTA HAI KI YE KABHHI SOLVE BHI NAHI HO PAAYENGA
Post a Comment