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तब तक ... ... . : रावेंद्रकुमार रवि

>> Saturday, February 20, 2010

तब तक ... ... .










हमारी मुलाकात
हमेशा ऐसे ही होती है -
मैं देर से पहुँचता हूँ
और वह
"इतनी देर क्यों कर दी?"
"देर से क्यों आए?"
देर तक पूछती रहती है!

लेकिन मैं
उत्तर दिए बिना
उसे अपलक निहारता रहता हूँ!
फिर वह भी,
मुझे!

और जब मैं चलने लगता हूँ,
तो वह
तब तक मुझसे
"कब मिलोगे?"
"कहाँ मिलोगे?"
पूछती रहती है,
जब तक कि मैं
उसे बता नहीं देता हूँ!

रावेंद्रकुमार रवि

7 टिप्पणियाँ:

अशोक कुमार पाण्डेय February 20, 2010 at 10:51 PM  

समय से पहुंचा कीजिये भाई
अभी तो ठीक है बाद में कहीं दिक्कत न हो…
अनुभव से बता रहा हूं…
:-)

शरद कोकास February 20, 2010 at 11:04 PM  

मै तो अशोक की टिप्पणी पढ़कर हँसे जा रहा हूँ । अब सही है सही समय से पहुंचिये तो सही सही कविता भी बनेगी ।

Mithilesh dubey February 21, 2010 at 12:45 AM  

अरे भईया समय से पहुचा करिए हाँ आगे से ध्यान दीजियेगा , बढ़िया अभिव्यक्ति लगी ।

Arshad Ali February 21, 2010 at 12:59 AM  

बड़े भाई आप किसी की बात मत मानियेगा
समय से पहुँच जाते तो ये कविता कहा बन पाती
और बिलम्ब कीजिये नहीं तो ऐसा कीजिये एक आध दिन के लिए गायब हो जाईये तब देखिये मिलने का और मज़ा आएगा ...

सुन्दर कविता सुन्दर प्रस्तुति

Udan Tashtari February 21, 2010 at 1:21 AM  

अशोक जी भी!! :)

बढ़िया कविता.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक February 21, 2010 at 6:24 AM  

"समय बहुत अनमोल है, इसका रक्खो ध्यान।
गया समय आता नही, कहते हैं विद्वान।।"

चंदन कुमार झा February 21, 2010 at 9:37 PM  

सुन्दर !!!

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