कविता एक सुरीली : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत
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*सभी नन्हे साथियों को ढेर-सारा प्यार!*
नए साल में मैं अभी तक
सरस पायस पर कोई रचना नहीं सजा पाया था!
आज अंतरजाल पर विचरण करते समय
मेरी मुलाकात अनुष्का से...
13 years ago
22 टिप्पणियाँ:
प्रियवर रावेंद्रकुमार रवि जी!
मन से बनाये गये नव्य-ब्लॉग
"रवि मन" का मन से स्वागत करता हूँ!
सजाने,
मैं उन्हें
अपने हृदय के
गीत की
सबसे मधुरतम्
तान से!अति सुन्दर मन भावन ब्लॉग ,ढेरो बधाईयाँ आपको
स्वागत है आपके इस ब्लॉग का.
बहुत सुन्दर है ब्लाग और पहली रचना तो कमाल है
मैं तुम्हारी
हृदय-वीणा की
मधुर झंकार
सुनना चाहता हूँ!
बहुत बहुत शुभकामनायें
स्वागत है आपके इस ब्लॉग का...WELCOME
सुन्दर…अति सुन्दर!!
चला आऊँगा
सजाने,
मैं उन्हें
अपने हृदय के
गीत की
सबसे मधुरतम्
तान से!
Bahut sundar! Aur utnahi sundar chitr bhi!
मैं तुम्हारी
हृदय-वीणा की
मधुर झंकार
सुनना चाहता हूँ!
Bahut sundar!
Tahe dilse swagat hai!
सुन्दर रचना॥
शुभकामनायें ।
हिंदी ब्लाग लेखन के लिये स्वागत और बधाई । अन्य ब्लागों को भी पढ़ें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देने का कष्ट करें
आपके मनोभाव को समझ रहे है रवि जी बेहतरीन
सुन्दर है भाई रवि ! मेरी शुभकामनाएं !
सुन्दर ब्लॉग और मनभावन रचना !
बहुत सुन्दर.. ब्लॉग.. सुन्दर रचना..
बहुत बहुत स्वागत है. गीत तो बहुत सुन्दर है ही.
मैं तुम्हारी
हृदय-वीणा की
मधुर झंकार
सुनना चाहता हूँ!
सुन्दर…अति सुन्दर!!!
मन की मधुर तान से शुरू किया है आपने ये ब्लॉग....बहुत खूब और बधाई
सुन्दर…अति सुन्दर!!
बधाई !
नए ब्लाग की !
जय हो !
आपकी कविता बहुत अच्छी लगी । इस ब्लॉग के माध्यम से आपकी रचनाएँ पढ़ने को मिलती रहेंगी । आपको बहुत-बहुत बधाई।
दोनों कविताएं खूबसूरत हैं ,क्योंकि इनमें सहजता सरसता और अनुभूतियों की आवरणरहित अभिव्यक्ति है ।
बहुत मधुर है।
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