नन्हे दोस्तों को समर्पित मेरा ब्लॉग

कुछ दिनों बाद : रावेंद्रकुमार रवि

>> Friday, March 12, 2010

कुछ दिनों बाद











नहीं कहूँगा -
तुम मेरी हो,
तुम भी मत कहना -
तुम मेरे!

बस यूँ ही
मिलती रहना,
मुस्कानों के

उपहार सहित!


कुछ दिनों बाद
सब स्वयं कहेंगे -
वह उसकी,

वह उसका है!

--

रावेंद्रकुमार रवि

7 टिप्पणियाँ:

बूझो तो जानें March 12, 2010 at 4:10 PM  

बहुत सुन्दर कविता. शुभकामनाएं...

राकेश कौशिक March 12, 2010 at 4:17 PM  

सुंदर कविता - सच्ची मुस्कान खुद सबकुछ बयां करेगी और लोग भी कहेंगे.

RaniVishal March 12, 2010 at 9:13 PM  

Saral andaaz me sundar baat bayaan kari aapane...Bahut khub!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

ज्योति सिंह March 12, 2010 at 10:24 PM  

kitni saralata se kitni gahri baat kah di ,sundar rachna

चंदन कुमार झा March 12, 2010 at 11:29 PM  

कितनी प्रेमपूर्ण बात है यह । सच में सच्चा प्रेम तो ऐसा ही होता है उसे विज्ञापन की आवश्यकता नहीं होती । बहुत सुन्दर रचना ।

Ravindra Ravi March 18, 2010 at 11:37 PM  

वाह वाह. बहुत सही.

संजय भास्कर April 2, 2010 at 7:45 AM  

हर रंग को आपने बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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