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सुमधुर आवाज़ : रावेंद्रकुमार रवि

>> Friday, March 26, 2010

सुमधुर आवाज़











जब भी
आती
है याद
वह सिंदूरी शाम,
जब देखा था मैंने
तुम्हें पहली-पहली बार,

अनुगुंजित

होती
है
अंतस के कोनों में
यह सुमधुर आवाज़ --
"
प्रिया, ख़त लिखूँ तुम्हें!"


रावेंद्रकुमार रवि

6 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari March 26, 2010 at 8:42 AM  

बहुत उम्दा!

रानीविशाल March 26, 2010 at 7:17 PM  

Behad Khubsurat.

चंदन कुमार झा March 26, 2010 at 11:21 PM  

प्रेममयी अभिव्यक्ति । यह कविता हृदय के तार झंकृत करती है ।

हर्षिता March 28, 2010 at 1:26 AM  

सुन्दर रचना।

अक्षिता (पाखी) March 30, 2010 at 9:59 AM  

बहुत सुन्दर रचना...

संजय भास्कर April 1, 2010 at 1:16 PM  

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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