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अद्वितीय होता है : नई कविता : रावेंद्रकुमार रवि

>> Wednesday, June 15, 2011

अद्वितीय होता है 
 
चाहे 
कितनी भी देर में सही
पर 
जब पहनाती है प्रकृति 
कैक्टस को मुकुट
तो वह 
अद्वितीय होता है!
रावेंद्रकुमार रवि
  

6 टिप्पणियाँ:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) June 15, 2011 at 7:45 AM  

जी हाँ!
सबसे अद्वितीय काँटों का ताज ही होता है!

डॉ॰ मोनिका शर्मा June 15, 2011 at 9:20 AM  

अद्वितीय रचना ....सुंदर बिम्ब...

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" June 15, 2011 at 12:14 PM  

अप्रतिम - अद्भुत - प्रेरक




क्या करें ?-डा. सुरेन्द्र विक्रम

Kailash C Sharma June 15, 2011 at 2:04 PM  

बहुत सुन्दर रचना..

Sunil Kumar June 17, 2011 at 11:01 PM  

काँटों का ताज ,सुंदर बिम्ब..

Er. सत्यम शिवम June 18, 2011 at 5:41 PM  

बहुत सुंदर उपमानों से सजी बेहतरीन रचना..लाजवाब।

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