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सजाकर मुस्कान में : रावेंद्रकुमार रवि

>> Wednesday, June 22, 2011

सजाकर मुस्कान में





हो गईं सुवासित
सब हृदय की वीथिकाएँ,
जब किया
तुमने पदार्पण
सजाकर मुस्कान में
निश्छल प्रणय की
भावनाओं को!

रावेंद्रकुमार रवि

3 टिप्पणियाँ:

डॉ॰ मोनिका शर्मा June 22, 2011 at 9:40 AM  

प्रेमपगे ...निश्छल भाव.... सुंदर पंक्तियाँ

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) June 22, 2011 at 10:40 PM  

बहुत छोटी किन्तु सशक्त रचना!

Kailash C Sharma June 23, 2011 at 1:23 PM  

बहुत सुन्दर कोमल अहसास...

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