नन्हे दोस्तों को समर्पित मेरा ब्लॉग

ऐसे करवाचौथ मनाओ : नवगीत : रावेंद्रकुमार रवि

>> Tuesday, October 26, 2010

ऐसे करवाचौथ मनाओ! 


ख़ुशियों का मधुमास बुलाओ,
ऐसे करवाचौथ मनाओ!

मन से मन तक डोर
प्रणय की बाँधो मन से,
उसे भिगोकर अपने
प्रियतम् के सुमिरन से,

सुधियों से परिहास सजाओ,
ऐसे करवाचौथ मनाओ!

यौवन तक खिल-खिलकर
जो आया बचपन से,
पुलिकत झलक-झलककर
जो सुखमय जीवन से,

वह निश्छल विश्वास जगाओ,
ऐसे करवाचौथ मनाओ!

रावेंद्रकुमार रवि

8 टिप्पणियाँ:

संगीता पुरी October 26, 2010 at 8:35 AM  

बहुत खूब !!

PURNIMA TRIPATHI October 26, 2010 at 8:58 AM  

बहुत सुंदर रचना है

Coral October 26, 2010 at 3:22 PM  

bahut sundar

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) October 26, 2010 at 6:32 PM  

करवा चौथ के अवसर पर
नवगीत पढ़कर आनन्द आ गया!
--
बहुत-बहुत बधाई!
--
सुन्दर प्रस्तुति!
--
आपकी पोस्ट को बुधवार के
चर्चा मंच पर लगा दिया है!
http://charchamanch.blogspot.com/

शारदा अरोरा October 26, 2010 at 7:27 PM  

aanandit kiya geet ne ..

डॉ॰ मोनिका शर्मा October 26, 2010 at 11:46 PM  

बहुत ही सुंदर रविजी..... तभी सार्थक होगा यह व्रत उपवास...जो जीवन की खुशहाली के लिए होता है....

रंजना October 27, 2010 at 5:28 PM  

सुन्दर सन्देश देती सुन्दर रचना...वाह....

संगीता स्वरुप ( गीत ) October 27, 2010 at 10:53 PM  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

Related Posts with Thumbnails

"सप्तरंगी प्रेम" पर पढ़िए मेरे नवगीत -

आपकी पसंद

  © Blogger templates Sunset by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP